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11
إِذ يُغَشّيكُمُ النُّعاسَ أَمَنَةً مِنهُ وَيُنَزِّلُ عَلَيكُم مِنَ السَّماءِ ماءً لِيُطَهِّرَكُم بِهِ وَيُذهِبَ عَنكُم رِجزَ الشَّيطانِ وَلِيَربِطَ عَلىٰ قُلوبِكُم وَيُثَبِّتَ بِهِ الأَقدامَ

फ़ारूक़ ख़ान & नदवी

ये वह वक्त था जब अपनी तरफ से इत्मिनान देने के लिए तुम पर नींद को ग़ालिब कर रहा था और तुम पर आसमान से पानी बरस रहा था ताकि उससे तुम्हें पाक (पाकीज़ा कर दे और तुम से शैतान की गन्दगी दूर कर दे और तुम्हारे दिल मज़बूत कर दे और पानी से (बालू जम जाए) और तुम्हारे क़दम ब क़दम (अच्छी तरह) जमाए रहे