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10
إِنّا نَخافُ مِن رَبِّنا يَومًا عَبوسًا قَمطَريرًا

फ़ारूक़ ख़ान & नदवी

हमको तो अपने परवरदिगार से उस दिन का डर है जिसमें मुँह बन जाएँगे (और) चेहरे पर हवाइयाँ उड़ती होंगी