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22
فَدَلّاهُما بِغُرورٍ ۚ فَلَمّا ذاقَا الشَّجَرَةَ بَدَت لَهُما سَوآتُهُما وَطَفِقا يَخصِفانِ عَلَيهِما مِن وَرَقِ الجَنَّةِ ۖ وَناداهُما رَبُّهُما أَلَم أَنهَكُما عَن تِلكُمَا الشَّجَرَةِ وَأَقُل لَكُما إِنَّ الشَّيطانَ لَكُما عَدُوٌّ مُبينٌ

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

इस प्रकार धोखा देकर उसने उन दोनों को झुका लिया। अन्ततः जब उन्होंने उस वृक्ष का स्वाद लिया, तो उनकी शर्मगाहे एक-दूसरे के सामने खुल गए और वे अपने ऊपर बाग़ के पत्ते जोड़-जोड़कर रखने लगे। तब उनके रब ने उन्हें पुकारा, "क्या मैंने तुम दोनों को इस वृक्ष से रोका नहीं था और तुमसे कहा नहीं था कि शैतान तुम्हारा खुला शत्रु है?"