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18
أَفَمَن كانَ مُؤمِنًا كَمَن كانَ فاسِقًا ۚ لا يَستَوونَ

फ़ारूक़ ख़ान & नदवी

तो क्या जो शख़्श ईमानदार है उस शख़्श के बराबर हो जाएगा जो बदकार है (हरगिज़ नहीं) ये दोनों बराबर नही हो सकते